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अनियोजित शहरीकरण की स्थिति में शिक्षा अश्विनी कुमार ‘सुकरात’

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जितने लोग रोजगार की तलास में गांवों से शहरों की तरफ पलायन करते है, उससे कहीं गुणा अधिक उन पर आश्रित लोग उनके साथ पलायन कर रहे होते है और इसमें एक बड़ी संख्या विद्यालय जाने योग्य बच्चों की भी होती है। शहरी क्षेत्र में जनसंख्या के पलायन के हिसाब से आवासीय क्षेत्रों का नियोजन न किया जाए तो, लोग अनियोजित क्षेत्रों में रहने पर मजबूर होंगे। अब यदि अनियोजित आवासीय क्षेत्रों में पार्कों एवं विद्यालयों के लिए जगह ही न बचे तो, यह शहरीकरण बच्चों के शारीरिक, मानसिक, शैक्षिक अर्थात सर्वंगीण विकास में बाधाक है। तो, अनियोजित शहरीकरण की प्रक्रिया बच्चों के शैक्षिक अधिकारों का हनन कर रही है। अतः बच्चों के शैक्षिक अधिकारों की रक्षा के लिए अनियोजित शहरीकरण की प्रक्रिया को रोकना एवं नियोजित शहरीकरण शहरीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा देना जरूरी है। इसके लिए शिक्षा में क्रांतिक निवेश की आवश्यकता है और उस क्रांतिक निवेश के लिए क्रांतिक चेतना की। विश्व और भारतीय परिदृश्य कार्ल मार्क्स ने दास कैपिटल में कहा था , “ मजदूरों का कोई देश नहीं होता। ” (M...