भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कम्युनिस्टों की चुप्पी खल रही है । JUNE 10, 2011 ( मोहल्ला लाइव इ-पत्रिका) की पोस्ट-लेख
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कम्युनिस्टों की चुप्पी खल रही है जूता चलेगा देस बचेगा ! जूता चलेगा नेता डरेगा !! BY · JUNE 10, 2011 ( मोहल्ला लाइव इ-पत्रिका) ♦ अश्विनी कुमार ‘ सुकरात ’ ये लेख मैंने विश्वजीत सेन के लेख भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कम्युनिस्टों की चुप्पी खल रही है से प्रेरित होकर लिखा है। मेरा विचार है कि कम्युनिस्ट आंदोलन आज वैचारिक बिखराव की स्थिति में है। वह संगठित पूंजीवाद और पूंजीवाद द्वारा बिखेरे जनवाद की मध्य दिशा नहीं तलाश पा रहा। कभी वो कहता है पूंजीवाद ही विश्व का सत्य है (बुद्धदेव) , कभी पूंजीवादी बदलाव का विरोध करता है। वर्ण और वर्ग के भेद में उलझ जाता है। वह भूल जाता है कि मार्क्स शोषित वर्ग की एकता की बात करते थे : अश्विनी कुमार ‘ सुकरात ’ भा रतीय वामपंथ की सबसे बड़ी समस्या ये है कि मार्क्सवाद जैसी महानदी को उन्होंने ठहरे हुए पानी में बदल दिया हैं। मार्क्सवाद द्वंदात्मक भौतिकतावाद पर आधारित है और जो विज्ञानवाद को बढ़ावा देता है। विज्ञानवाद जांच पड़ताल के आधार पर सत्य को खोजने के वैचारिक उत्थान पर बल देता है। परिस्थित...