अंग्रेजी माध्यम राज व्यवस्था का परिणाम - अंग्रेजी माध्यम विद्यालय
जब तक जन भाषाओं का प्रयोग शासन, प्रशासन तथा उच्च शिक्षा के श्रेष्ठ माने जाने वाले संस्थानों में नहीं होगा, तब तक स्कूली शिक्षा का माध्यम साँस्कृतिक परिवेश के अनुरूप भी नहीं होगा। अतः बेहतर यह होगा की स्कूली शिक्षण को सुधारने के बजाए उच्च शिक्षण के तथाकथित सर्वश्रेष्ठ संस्थानों, नौकरियों एवं उच्च शिक्षण संस्थाओं की परीक्षाओं का आयोजन करने वाली एजेंसियों जैसे यूपीएससी, एसएससी, राज्य-पीसीएस, IIM-CAT आदि इसके अतिरिक्त सत्ता के तमाम दूसरे केन्द्र जैसे सम्पूर्ण विधायिका, कार्यपालिका, सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालय के ढाँचे में भी क्रांतिकारी परिवर्तन किए जाने की ज़रूरत है। जब तक इन संस्थाओं के ढांचे को संस्कृति की भाषा (क्षेत्रीय भाषाओं) के अनुरूप नहीं बनाया जायेगा, तब तक लोग उच्च शिक्षा के माध्मय से बेहतर भविष्य की तलाश की आस में अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों की तरफ़ भागते ही रहेंगे। अतः प्राथमिक शिक्षा की भाषा को परिवेश के अनुकूल बनाने की ज़रूरत नहीं है। ज़रूरत इस बात की है कि ‘इंग्लिश सिस्टम’ अंग्रेजी छोड़े। सारी समस्या की जड़ इंग्लिश मीडियम सिस्टम में है। विश्लेषण के दौरान निष्कर...