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Showing posts from July, 2018

विश्वविद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया के संबंध में सुधार के विषय में reformofugc@gmail.com को भेजा इमेल

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महोदय, भारत के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया भ्रष्टाचार और चाटुकारिता का अड़ा बन गयी है। इस विषय में युजीसी ने 7 जुलाई, 2018 को reformofugc@gmail.com पर शाम चार बजे तक ई.मेल के माध्यम से सुझाव मांगे थे।असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर निष्पक्ष नियुक्तियाँ हो इसके लिए स्वतंत्र , स्वयत और निष्पक्ष आयोग के माध्यम से ही किया जाए। जिसमें कम से कम राजनीतिक दखलअंदाजी हो। इस विषय पर हमारी तरफ से निम्न सुझाव reformofugc@gmail.com के माध्यम से सरकार को भेजे गये। 1.     उच्च शिक्षा से निजी कॉलेज एवं विश्वनिद्यालयों को पूर्णतः नदानद किया जाना चाहिए। निजी कॉलेजों एवं विश्वविद्यालय ,   शिक्षण संस्थान नहीं रहे , वे तो   ‘ डिग्री ’   नामक कागज के टुकड़े को बेचने की दुकान   बन गये है। 2.     अपवादों को छोड़ दे तो , निजी कॉलेज एवं   विश्वविद्यालय शिक्षकों को जिन शर्तों पर नियुक्त करते है वे दूर-दूर तक अकादमीक नहीं होते।    इन विश्वविद्यालयों में नियुक्ति की शर्त कम सैलरी पर काम ...

आय की असमानता कम हो! समान काम समान वेतन का सिद्धान्त लागू हो!! ठेकेदारी प्रथा ख्तम हो!!

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पहले पे कमीशन में तय सिद्धान्त को पढ़ो, जो सीधे संविधान के समान्तर आया था। पूर्णचः संविधान के सिद्धान्तों के आधार पर। नवउदारीकरण की वर्ल्डबैंक-आईएमएफ नीति की गुलामी को स्वीकार के बाद आए पे कमीशनों ने आय की असमानता को बढ़ाया है। पाँचवे से शुरू , छठे पे कमिशन के बाद तेजी से और सातंवे पे कमीशन ने संविधानिक सिद्धान्तों की धज्जियां ही उड़ाई। छठे पे कमीशन के बाद जहाँ एक तरफ ग्रुप डी और ग्रुप सी की लगभग सारी नौकरियाँ ठेकेदारों के हवाले कर दी गयी। वही ग्रुप ए और बी में नियुक्ति के लिए दौहरे मापदंड़ को अपनाया गया। एक तरफ चंद लोगों की तंख्वाह बेतहासा बढ़ा दी गयी। वही कांट्रेक्ट के आधार पर अधिकतरों की नियुक्ति की जाने लगी। जिसमें सबसे प्रभावित क्षेत्र शिक्षा का ही रहा। क्योकि सबसे ज्यादा ग्रुप बी ए की कांट्रेक्चुअल नौकरियाँ स्कूल से लेकर कॉलेज विश्वविद्यालय तक के शिक्षकों की रही । एक तरफ जहाँ चंद लोगों को बेतहाशा सिक्योर आय दे कर इस समाज से इस कदर काट के बाहर किया है कि उनके हीत आदानी अंबानी के साथ जूड़ गये है। दूसरी तरफ एक बड़ा वर्ग हमेशा अनिश्चितता की स्थिती में रहता है और उसकी स्थिती बद से...