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शोषनमुक्त व्यवस्था के लिए अज्ञानता का नाश करें। या विद्या सा विमुक्तये

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जब जनता जगती है >>>> तब व्यवस्था कांपती है सचेत एवं जागरूक जनता →→→→ जिम्मेदार एवं जबाबदेह व्यवस्था   भगतसिंह ने कहा, “ क्रांति की तलवार विचारों की शान पर तेज होती है। ”  इसलिए जब तक अज्ञानता है तब तक मजहब , जाति , अफ़सरशाही , नेताशाही , पूंजी , किसी न किसी माध्यम से , आम-जन का शोषण जारी रहेगा। गैरबराबरी की व्यवस्था बनी ही रहेगी। अज्ञानता ही सत्ता को चंद हाथों में समेट देती है। सत्ता का संकेन्द्रण ही भ्रष्टचार और दमन का मूलकारण है। जनतंत्र की ताकत जनता की ‘ सामूहिक निर्णय ’ लेने की शक्ति में निहित है। निर्णय लेने की प्रक्रिया में जितनी अधिक भागिदारी ‘ जन ’ की होगी उतना ही अधिक   ‘ विश्वशनीय एवं जबाबदेह जनतंत्र ’ होगा। जनतांत्रिक और/या समाजवादी और/या साम्यवादी और/या समतावादी अर्थात तमाम जनवादी मूल्यों को स्थापित करने की लड़ाई ‘ व्यक्ति केन्द्रित ’ तौर तरीकों से हासिल कर भी ली जाए तो वह स्थाई नहीं रह सकती | ‘ नायक ’ रूपी व्यक्ति को केंद्र में रख कर चलने का तरीका ‘ राजशाही ’ का है , जो अंततः ‘ फासीवाद ’ में   ही परिणीत होगा | चाहे चेहरा किसी भी विचारधा...

युजीसी नेट की परीक्षा लेना बंद करे, विश्विद्यालयों- कॉलेजों से असिस्टें प्रोफेसर रिक्त पदों का विवरण मांगे और सीधी नियुक्ति परीक्षा का आयोजन करे।

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युजीसी नेट की परीक्षा लेना बंद करे ,   विश्विद्यालयों- कॉलेजों से असिस्टें प्रोफेसर रिक्त पदों का विवरण मांगे और सीधी नियुक्ति परीक्षा का आयोजन करे। https://www.youtube.com/watch?v=2dNNzFJKPoQ&t=1s