शोषनमुक्त व्यवस्था के लिए अज्ञानता का नाश करें। या विद्या सा विमुक्तये

जब जनता जगती है >>>> तब व्यवस्था कांपती है
सचेत एवं जागरूक जनता →→→→जिम्मेदार एवं जबाबदेह व्यवस्था
 भगतसिंह ने कहा, क्रांति की तलवार विचारों की शान पर तेज होती है।  इसलिए जब तक अज्ञानता है तब तक मजहब, जाति, अफ़सरशाही, नेताशाही, पूंजी, किसी न किसी माध्यम से, आम-जन का शोषण जारी रहेगा। गैरबराबरी की व्यवस्था बनी ही रहेगी। अज्ञानता ही सत्ता को चंद हाथों में समेट देती है। सत्ता का संकेन्द्रण ही भ्रष्टचार और दमन का मूलकारण है। जनतंत्र की ताकत जनता की सामूहिक निर्णयलेने की शक्ति में निहित है। निर्णय लेने की प्रक्रिया में जितनी अधिक भागिदारी जनकी होगी उतना ही अधिक  ‘विश्वशनीय एवं जबाबदेह जनतंत्रहोगा। जनतांत्रिक और/या समाजवादी और/या साम्यवादी और/या समतावादी अर्थात तमाम जनवादी मूल्यों को स्थापित करने की लड़ाई व्यक्ति केन्द्रिततौर तरीकों से हासिल कर भी ली जाए तो वह स्थाई नहीं रह सकती | ‘नायकरूपी व्यक्ति को केंद्र में रख कर चलने का तरीका राजशाहीका है, जो अंततः फासीवादमें  ही परिणीत होगा| चाहे चेहरा किसी भी विचारधारा का क्यों न हो। कुछ भी-कोई भी हो। क्या आप अज्ञानता का नाशकर सामूहिक नैतृत्वको पैदा करने वाले इस अभियान का हिस्सा बनना चाहेगे ???
जनचेतना जनमुक्ति
(सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, प्रतिष्ठा और अवसर की समता एवं व्यक्ति की गरिमा हासिल करने का अभियान)
जन चेतना से जन क्रांति तक..
विचार करें! विमर्श करें! आलोचना-समालोचना करें! और कुछ नहीं तो बात-चीत ही करें, पर चुप न रहें! तर्कपूर्ण लगे तो सांझा करें!

फोन/फेसबुक/व्टसएप/इमेल संपर्क : 9210473599, janchetna.janmukti@gmail.comhttp://janchetna-janmukti.blogspot.in/

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