“जय हिन्द” के नारे से ज्यादा महत्वपूर्ण है हिन्दुस्तानी का भाव
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की प्रेरणा से, आजकल बहुत से निजी स्कूलों में भी बच्चों को “ जय हिन्द ” का नारा तो लगवाया जा रहा है , पर हिन्दुतानी (भारतीय)भाषाओं से न केवल विमुख किया जा रहा है, अपितु जिस तरह से शैक्षिक गतिविधियाँ चल रहीं है, उससे एक हिकारत का भाव भी पैदा हो रहा है। अंग्रेजी के माध्यम से, जो शिक्षा का ड्रामा चल रहा है, वह बच्चों को स्थाई तौर पर मानसिक गुलाम बनाने की ही विधि एवं प्रक्रिया है। इसी विषय पर विद्यालय प्रबंधक/प्रचार्य को लिखा खुला पत्र.. एक प्रति प्रधानमंत्री, मानव संसाधन मंत्री, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री को भी.... महोदय, जोर जबरदस्ती और डर पैदा कर के करवाया , “ जय हिंद ” ... बच्चों में उस अनुराग का छठांश तो दूर लाखांश भी पैदा नहीं कर सकता , जो नेता जी ने “ जय हिन्द ” के नारे से दिया। “ जय हिन्द ” का नारा लगवाने से कही ज्यादा जरूरी है “ जय हिन्द ” का भाव पैदा करना। “ जय हिन्द ” का भाव पैदा करने के लिए , सबसे पहले हमें बच्चों को उनकी अपनी अस्मिता की पहचान, करना सीखाना होगा। हमें सीखाना होगा कि “ हिन्द ” कोई नक्से पर खीची रेखाओं का नाम नहीं है। “ ह...