शिक्षा व्यवस्था की खस्ताहाल स्थिती की सूचना और स्कूल जाने योग्य बच्चों एवं युवाओं की संख्या के अनुपात में स्कूल कॉलेज खोलने की मांग।


विचार करें! विमर्श करें! आलोचना-समालोचना करें! और कुछ नहीं तो, जनमुद्दों पर बात-चीत ही करें, पर चुप न रहें! तर्कपूर्ण लगे तब ही इस पत्र को सांझा करें एवं जनजागरण की मुहिम में शामिल हो!! अपने अपने क्षेत्र का सर्वे कर शिक्षा अधिकार अधिनियम में वर्णीत शिक्षक विद्यार्थी अनुपात के अनुरूप कुल अहर्तायुक्त शिक्षकों की संख्या एवं विद्यालयों की संख्या का पता लगाएं और यदि शिक्षा अधिकार अधिनियम के अनुरूप शिक्षक और विद्यार्थी अनुपात नहीं है तो, सीधे उच्चन्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में अपील करें। जय हिन्द ।

सेवा में,
1.      माननीय संविधान पीढ़,  सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली।
2.      माननीय राष्ट्रपति महोदय, राष्ट्रपति भवन, नई  दिल्ली ।
3.      माननीय प्रधानमंत्री महोदय एवं कैबिनेट मंत्रीगण, प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली ।
4.      माननीय मुख्य मंत्री एवं शिक्षा मंत्री समेत अन्य कैबिनेट मंत्रीगण, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली।
5.      माननीय नार्थ-इस्ट दिल्ली के सांसद एवं दिल्ली के समस्त लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद, संसद भवन, नई दिल्ली ।
6.      माननीय पार्षद सोनिया विहार एवं राजीव विहार, दिल्ली।
7.      महापौर, पूर्वी दिल्ली एमसीडी, दिल्ली।
8.       डीएम एवं एसडीएम, नोर्थ-इस्ट दिल्ली।
9.      सचिव, एमएचआरडी, भारत सरकार, दिल्ली
10. शिक्षा सचिव, दिल्ली सरकार।
दिल्ली(भारत)
विषय : सोनिया विहार,करावलनगर,नोर्थ-इस्ट दिल्ली, क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की खस्ताहाल स्थिती की सूचना और स्कूल जाने योग्य बच्चों एवं युवाओं की संख्या के अनुपात में स्कूल कॉलेज खोलने की मांग।
माननीय महोदय
एशिया के सबसे बड़े वाटर प्लांट के नाम से जाना जाने वाला सोनिया विहार दिल्ली के उत्तरी-पूर्वी जिले के करावल नगर विधानसभा क्षेत्र में बसा एक घना इलाका है। विभिन्न स्रोत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में इसकी आबादी 3-4 लाख के बीच है। अब सोनिया विहार के साथ सटे, सोनिया विहार से भी घने इलाके, राजीव विहार और कच्ची खजूरी की जनसंख्या को इस आबादी में जोड़ ले तो, तो यमुना के दो बांधों के बीच बसे इस छोटे से इलाके की कुल जनसंख्या 6-7 लाख करीब हो जाएगी। यमूना नदी के साथ सटे इस छोटे से क्षेत्र में घने रूप में सरकार द्वारा गैर योजनागत रूप से बसाये, निम्न मध्यमवर्गीय इलाके की जनसंख्या किसी मध्य आकार के शहर से कम नहीं है। इस इलाके की जनसंख्या की ताकत को इस तरह से समझ सकते है कि इस छोटे से इलाके से दो MCD के पार्षद चुने जाते है। यदि इस क्षेत्र की अपनी स्थानीय सरकार बनाने का अधिकार होता तो, इस क्षेत्र की अपनी नगर पालिका या नगर निगम भी होता। परन्तु यदि इस क्षेत्र की नागरिक सुविधाओं की बात की जाए तो, क्या शिक्षा,क्या स्वास्थ्य, यह इलाका एक दूर दराज के गांव को मिलने वाली जनसुविधाओं से भी गया गुजरा है। हर तरह की नागरिक सुविधाओं से वंचित, इस इलाके का सिर्फ एक ही सकारात्मक पक्ष है। वह पक्ष यह है कि यह इलाका मुख्य दिल्ली शहर से ज्यादा दूर नहीं है। अन्यथा स्कूल हो, वॉकेशनल ट्रेनिग सैंटर हो, कॉलेज हो या हस्पताल, डाक, हर तरह की नागरिक सुविधाओं से उपेक्षित। (नोट:-जनसंख्या संबंधित आकड़े विकिपीडिया एवं अन्य स्रोत्रों से है। लेखक का इस विषय पर कोई व्यक्तिगत सर्वे नहीं है।)
फिलहाल इस पत्र में हम आपका ध्यान इस क्षेत्र की खस्ताहाल शिक्षा की व्यवस्था की तरफ दिलाना चाहते है।
जैसा कि संसद द्वारा पास कानून के अनुसार 6-14 साल के बच्चे संवैधानिक शिक्षा अधिकार(अनुच्छेद 21A) के दायरे में भी आते है।
संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 ने भारत के संविधान में अंत: स्‍थापित अनुच्‍छेद 21-क, ऐसे ढंग से जैसाकि राज्‍य कानून द्वारा निर्धारित करता है, मौलिक अधिकार के रूप में छह से चौदह वर्ष के आयु समूह में सभी बच्‍चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है। नि:शुल्‍क और अनिवार्य बाल शिक्षा (आरटीई) अधिनियम, 2009 में बच्‍चों का अधिकार, जो अनुच्‍छेद 21क के तहत परिणामी विधान का प्रतिनिधित्‍व करता है, का अर्थ है कि औपचारिक स्‍कूल, जो कतिपय अनिवार्य मानदण्‍डों और मानकों को पूरा करता है, में संतोषजनक और एकसमान गुणवत्‍ता वाली पूर्णकालिक प्रांरभिक शिक्षा के लिए प्रत्‍येक बच्‍चे का अधिकार है। इस अधिनियम के अनुसार:-
Ø  6 से 14 साल की उम्र के हरेक बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है। संविधान के 86वें संशोधन द्वारा शिक्षा के अधिकार(अनुच्छेद 21A) को प्रभावी बनाया गया है।
Ø  सरकारी स्कूल सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध करायेंगे और स्कूलों का प्रबंधन स्कूल प्रबंध समितियों (एसएमसी) द्वारा किया जायेगा। निजी स्कूल न्यूनतम 25 प्रतिशत बच्चों को बिना किसी शुल्क के नामांकित करेंगे।
Ø  प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता समेत प्रारंभिक शिक्षा के सभी पहलुओं पर निगरानी के लिए लिए राष्ट्रीय आयोग बनाया जायेगा।
Ø  इस अधिनियम के अनुसार प्रत्येक इलाके में कम से कम एक स्कूल का प्रावधान है।
Ø  इसके अंतर्गत एक स्कूल निगरानी समिति के गठन प्रावधान है, जो समुदाय के निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम स्कूल की कार्यप्रणाली की निगरानी करेगी।
Ø  सभी स्कूलों को सीखने के प्रभावकारी वातावरण के लिए बुनियादी ढांचों और शिक्षक नियुक्ति के नियमों का पालन करना चाहिए।
Ø  प्राथमिक स्तार पर हरेक 60 बच्चों पर दो प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्धन कराए जाने चाहिए।
Ø  शिक्षकों की संख्या बच्चों की संख्या के आधार पर होनी चाहिए न कि ग्रेड के आधार पर।
Ø  स्कूल को पाठ्यचर्या के निर्देशों को पूरा करना चाहिए, समाप्ति निर्देशों के मुताबिक, सीखने की क्षमता बढ़ाना और उन्हें माता-पिता और शिक्षकों के बीच बैठकें करानी चाहिए।
Ø  सरकार बच्चों को सीखने में बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों को पर्याप्त सहयोग सुनिश्चित करेगा। समुदाय और नागरिक समाज एसएमसी के साथ निष्पक्ष तरीके से स्कूल की गुणवत्तार सु‍निश्चित करने में महत्वपूर्ण भ‍मिका अदा करेंगें। राज्यक नीति फ्रेमवर्क उपलब्धक कराएगा और हरेक बच्चे के लिए आरटीई को सुनिश्चित करने का वातावरण बनाएगा।
सोनिया विहार इलाके की शिक्षा की व्यवस्था
        i.            अमुमन जनसंख्या का 50 %  हिस्सा 0-18 साल के बीच का होता उसका भी लगभग आधा हिस्सा 6-14 साल के बच्चों का होता है। इस प्रकार 18 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या  3-3.5 लाख करीब हुई और 1.5-1.75 लाख करीब जनसंख्या 6-14 साल के बच्चों की हुई ।
      ii.            0-18 वर्ष की उम्र वह उम्र है, जब बच्चा अपना शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक विकास करते हुए पूर्ण युवा में तब्दील होता है। उसके संतुलित शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक विकास के लिए आंगनबाड़ी, प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चमाध्यमिक विद्यालय, खेलकुद केन्द्रों आदि  की आवश्यकता होती है।
    iii.            अब जारा स्कूलों की स्थिति का आंकलन कर ले। सोनिया विहार के 6-11 साल तक के 60-70 हजार बच्चों के लिए पहली से पांचवी कक्षा तक का सिर्फ एक एमसीडी प्राथमिक स्कूल (सरकारी) है। इसी प्रकार राजीव विहार एवं कच्ची खजूरी के 50-60 हजार बच्चों पर एक एमसीडी प्राथमिक स्कूल (सरकारी) है। ये दोनों स्कूल दो शिफ्ट में चलते है।
    iv.            इस पूरे इलाके(सोनिया विहार, राजीव विहार, कच्ची खजूरी) में 6-12वीं कक्षा के लिए पांचवे पुस्ते स्थित मात्र एक दिल्ली सरकार का सेकेंडरी-सह-सीनियर सेकेंडरी स्कूल है। वह भी दो शिफ्ट में चलता है। यह स्कूल भी कॉलोनी के दूसरे छोर पर स्थित होने की वजह से शेष सोनिया विहार, राजीव विहार, कच्ची खजूरी से पर्याप्त दूरी रखता है। इस प्रकार यह स्कूल शेष कॉलोनी से कटा हुआ है। कॉलोनी के मुख्य हिस्से में कोई स्कूल नहीं है।
      v.            ये सभी स्कूल किसी भी तरह से सोनिया विहार, राजीव विहार, कच्ची खजूरी के बच्चों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। इस वजह से गली-गली में निजी प्राथमिक/माध्यमिक स्कूल खुल रहे है। इन निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले अधिकतर शिक्षक गैर-अहर्ता मतलब, अंडर क्वालिफाइड और अंट्रेंड है। इस इलाके के शायद ही किसी निजी स्कूल के पास पूर्ण अहर्तायुक्त शिक्षकों का स्टाफ हो। शिक्षा अधिकार अधिनियम के अनुसार शिक्षक होने की न्युनतम योग्यता में उसकी शैक्षिक योग्यता, व्यवसायीक योग्यता(डीएड, बीएलएड, बीएड ) एवं टीचर एलिजिबिलिटी टैस्ट(CTET) होना अनिवार्य है। परन्तु इस योग्यता को पूरा किए बीना भी कई लोग इन निजी स्कूलों में औने-पौने दाम पर शिक्षण कर रहे है।
    vi.            गौर करने वाली बात यह है कि शैक्षणिक कार्य में लगे इन स्कूल कर्मियों को शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षक नहीं माना जा सकता। तो इन कर्मियों के द्वारा विद्यार्थियों को पढ़ाने की क्रिया को भी शिक्षा नहीं माना जा सकता।
 vii.            इस प्रकार सोनिया विहार, राजीव विहार, कच्ची खजूरी, इलाके के 6-11 + 11-14 साल के बच्चे( विद्यार्थी) शिक्षा अधिकार अधिनियम के अनुरूप शिक्षा अधिकार(भारतीय संविधान 21A) से पूर्णतः वंचित है।    
viii.            छोटी-छोटी तंग इमारतों में चलने वाले ये निजी स्कूल, विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के लिए खेल-कुद का पर्याप्त स्थान देने में अक्षम ही नहीं, इन स्कूलों में आग-आगजनी जैसी आपदा की स्थिति में विद्यार्थियों के निकासी का पर्याप्त प्रबंध नहीं है। इस प्रकार, सिर्फ शिक्षा अधिकार (अनुच्छेद 21A) ही नहीं, जीवन के अधिकार(21) का भी खुल्लम-खुला उलंघन हो रहा है।
   ix.            एक ऐसा स्कूल जो विद्यार्थियों को खेल कुद के माध्यम से शारीरिक, सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से भावनात्मक एवं विवेचनात्मक शिक्षाशास्त्र के माध्यम से बौद्धिक विकास के लिए अवसर नहीं प्रदान करता, ऐसे स्कूल को शिक्षा अधिकार अधिनियम के अनुरूप विद्यालय माना भी नहीं जा सकता।
      x.            ऐसी स्थिति में वे निजी स्कूल जिसमें आपदा(आग आदि), शारीरिक विकास(खेल-कुद के लिए मैदान आदि) एवं सरकार द्वारा तय तंख्वाह पर, 30 विद्याथीं :1 शिक्षक के अनुपात में सीटैट पास, पूर्ण अहर्तायुक्त शिक्षक नहीं है, ऐसी स्कूलों को स्कूल की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। अब सवाल यह उठता है कि शिक्षा अधिकार अधिनियम का उलंघन करने वाले विद्यालयों के नाम पर चलने वाली शिक्षा की दूकानों को सरकार स्कूल के रूप में मान्यता कैसे दे सकती है। यह किसी भी तरह से स्पष्ट नहीं है।
     xi.            बहुत से लोग अपने बच्चों को इस इलाके से बाहर के स्कूलों में भेजते है। स्कूलों की पर्याप्त संख्या के आभाव में यहाँ के लोग अपने बच्चों को शिक्षा के लिए यमुनाविहार, लुडलों कैसल, तिमारपुर जैसे इलाकों में भेजने के लिए विवश  है। प्रयाप्त साधनों के आभाव में विद्यार्थी भी अपने जीवन को जोखिम में डाल कर, बसों के पायदानों पर लटक कर यात्रा करने को मजबूर है। नानकसर तिराहे पर, ये बच्चे अक्सर अंजान लोगों से लिफ्ट की गुहार करते पाये जाते है, गाडियों के पीछे दौड़ कर लटकते है। जिसकी वजह से अकसर दुर्घटनाओं का शिकार भी हो जाते है। इन इलाके में पर्याप्त स्कूल हो तो, शायद ही कोई अपने बच्चे को दूसरें इलाकों में भेजे।
 xii.            इसी प्रकार यदि पर्याप्त संख्या में बेहतर गुणवता के हर पुस्ते, हर ब्लाक में पहली से आठवीं कक्षा तक के सरकारी स्कूल हो तो, शायद ही इस इलाके का कोई व्यक्ति निजी स्कूलों की तरफ देखे।
 xiii.            20 शिक्षकों वाले एक प्राथमिक/प्राइमरी स्कूल की क्षमता 600 विद्यार्थी की होती है। प्रशासनिक कर्मचारी एवं प्राचार्य अतिरिक्त। इस प्रकार यदि इस इलाके में 6-14 साल के बच्चों की संख्या यदि 1.5 लाख है तो शिक्षा अधिकार अधिनियम के नियम के अनुसार, इस इलाके में 250 प्राथमिक/प्राइमरी स्कूलों और 5000 शिक्षकों की आवश्यकता हुई।(नोट जनसंख्या की सही संख्या के अनुपात में स्कूल और शिक्षकों की संख्या घट और बढ़ सकती है।)
 xiv.            इसी प्रकार 1800 विद्यार्थियों की क्षमता वाले सेकेंडरी-सह-सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 60 शिक्षकों की आवश्यकता होती है। प्रचार्य, उप प्रचार्य एवं प्रशासनिक कर्मचारी अतिरिक्त। यदि इस क्षेत्र में 14-18 वर्ष के बच्यों की संख्या 75,000 है तो, इस प्रकार इस इलाके में 35 सेकेंडरी-सह-सीनियर सेकेंडरी स्कूलों एवं 2000 शिक्षको की आवश्यकता है।
अतः केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और एमसीडी से अनुरोध है कि
        I.            इस इलाके में जनसंख्या के अनुपात में 250 माध्यमिक (600 विद्यार्थी क्षमता वाले), 35 उच्चमाध्मिक विद्यालय(1800 विद्यार्थी क्षमता वाले) खोले जाए।
     II.            30विद्यार्थियों :1शिक्षक के अनुपात में अहर्तायुक्त एवं सीटेट पास शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। और इस बात का निजी एवं सरकारी विद्यालयों के लिए कड़ाई से पालन किया जाए।
   III.            उच्चमाध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान, वाणिज्य, मानविकी सभी विषयों के लिए विकल्प उपलब्ध हो।
  IV.            कम से कम चार आई.टी.आई एवं वोकेशनल ट्रेनिंग सेण्टर खोले जाए।
     V.            इस इलाके में इस क्षेत्र के युवाओं के लिए कम से कम एक कॉलेज खोला जाए।
नोट:-जनसंख्या संबंधित आकड़े विकिपीडिया एवं अन्य स्रोत्रों से है। लेखक का इस विषय पर कोई व्यक्तिगत सर्वे नहीं है। जनसंख्या की सही संख्या के अनुपात में स्कूलों और शिक्षकों की संख्या घट और बढ़ सकती है। मुख्य बात यह है कि शिक्षा अधिकार अघिनियम में तय शिक्षक विद्यार्थी अनुपात के अनुरूप शिक्षक एवं स्कूल उपलब्ध करवाएं जाएं।
भवदीय
1.      अश्विनी कुमार सुकरात
2.       

                                               

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