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Showing posts from March, 2017

भगतसिंह का तरिका : वैचारिक वैज्ञायानिक चेतना जागृत करने का मार्ग

भगतसिंह का तरिका : वैचारिक वैज्ञायानिक चेतना जागृत करने का मार्ग हमें एक खुले दिमाग से विचार करने की प्रवृति को बढ़ावा देना है.. हरतरह के हिंसात्मक तरिकों का विरोध करना है.. जैसे माओवादियों ने गरीबवर्ग को ही गरीबवर्ग के विरूद्ध खड़ा करने का काम किया...क्योकि जो आदिवासी मरते है वे भी गरीबवर्ग के होते है.... औरअर्धसैनिक बलों में काम करने वाले भी जो मजदूर-किसान के बच्चे ही होते है , न कि टाटा-बिडला-अंबानी खानदान के अर्थाथ वे भी गरीबवर्ग से ही रोजगार की तलास में अर्धसैनिक बलों में शामिल हुए है , .. इसलिए मावोवादी तरिका हमारी वैचारिक लड़ाई को कमजोर करता है....और भारतीय वातावरण में आत्मघाती ही है.. आज हालात में गांधी की अहिंसात्मक ढ़ाल और भगतसिंह का वैचारिक मार्ग ही सार्थक है। भगतसिंह का तरिका दूर-दूर तक हिसात्मक नहीं था। वे किसान-मजदूर के वैचारिक चेतना को जगाने के पक्षधर थे। उन्होंने खुद माना बम्ब और पिस्तौलों से क्रांति अर्थाथ मौजूदा व्यवस्था में परिवर्तन नहीं आता । मौजूदा व्यवस्था में यदि किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना है , तो वैचारिक क्रांति का मार्ग ही सार्थक है । अतः चेतन...
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"वामपंथ चुनाव हार सकता है , उसकी चुनावी जमानतें भी जप्त हो सकती है , हो सकता है कि उसे कभी संसदीय मोर्चे पर पूरे भारत में एक भी सीट हासिल न हो , तब भी वामपंथ का अस्तित्व रहेगा | क्योंकि श्रम और पूँजी की लड़ाई में श्रम खत्म नहीं हो सकता , यह पूँजी की मजबूरी है की वह श्रम का अमानविय शोषण तो कर सकता है लेकिन उसे खत्म नहीं कर सकता | खत्म अगर हो सकता है तो वह है पूँजी | श्रम की हिफाजत और श्रमिकों की संघर्ष की अगुआयी ही वामपंथी राजनीति है न कि कोई धर्म , जाति , नस्ल का शगुफा उछालना  | इतिहास गवाह है धर्म , जाति , नस्ल की भावना का उफान एक खास समय में उन्माद के रूप में चढ़ता अवश्य हैं लेकिन खत्म भी उसे ही होना पड़ता है |" - दयानिधि चौधरी *साभार* जलेस, दिल्ली, व्टसएप ग्रुप से साभार [18/3 6:52 am] अश्विनी कुमार "सुकरात": 9210473599 नम्बर को, जो मेरा है, ज्यादा से ज्यादा प्रगतिशील ग्रुपों में डाले... आपके संपर्क में जो प्रगतिशील प्रवृति के - वैज्ञानिक द्वंधात्मक भौतिकतावाद/यथार्थवाद(जिसे हम मार्क्सवाद ही बोलते है) विचारधारा पर विश्वास करने वाल उनका न भी ग्रुपोंएवं ब्रोडकॉस्ट ...

हम सब भारत माता की है संतान, तो क्यो अधिकतर है कंगले और चंद धनवान??

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एक तरफ भारत माँ कहते है , साथ भारत माँ के टुकड़े टुकडें करते है । भारत माँ के खदानों की दलाली करते है । भारत माँ के गरीब आदिवासी बच्चों को बेदखल कर भारत माँ का सारा खनिज से अच्छादित आँचल चंद देशी अमीरों और विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हवाले के हवाले कर दते है ...   एक बढ़ई मेज बनाता है। बढ़ई मेज का मालिक हुआ । तो वह उसे बेचने का अधिकारी है। एक फैक्टरी का मालिक मजदूरों को लगा कर पदार्थ बनाता है। फैक्टरी का मालिक पदार्थ का मालिक हुआ । वह उसे बेचने का अधिकारी है। पर भारत माँ की भूमि को किसने बनाया ???? क्या किसी इंसान की पैदावार है , भारत माँ की भूमि ?????? यदि नहीं ? तो किसी एक का मालिकाना हक कैसे हो सकती है – भूमि ???   कोई कैसे इसकी खरीद फरोख़ कर सकता है ???   कोई कैसे भूमि का मालिक बन जाता है ??????? क्या कोई माता अपने अधिकतर बच्चों को खस्ताहाल और चंद को मालामाल कर सकती है ? ऐसी माता को भला हम क्या कहेगे ? ???? हम सब भारत माता की संतान है तो क्यों अधिकतर है निर्बल चंद माला-माल। अधिकतर बच्चों को न तो दो वक्त का पोषण वाला भोजन ही नशीब होता है, न ...

इंग्लिश मीडियम सिस्टम दैट इज अँग्रेज़ी राज पुस्तक... लिंक से पुस्तक डाउनलोड करे.

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इंग्लिश मीडियम सिस्टम दैट इज अँग्रेज़ी राज पुस्तक... लिंक से पुस्तक डाउनलोड करे.. शेयर करे! विचार करें ! विमर्श करें! ,,,,,,बात सही न हो तो विरोध करे.... बस चुप न रहे...!! (9210473599) अंग्रेजों के समय से ही भारतीय समाज में अंग्रेजीयत का वर्चस्व अंग्रेजों द्वारा राजसत्ता में सहयोग के लिए पैदा किये के सहभागी दलाल वर्ग का सांस्कृतिक वर्चस्व रहा है। शुरूआती दौर में अंग्रेजों ने उच्च वर्ण के ब्राह्मण और कायस्तों के साथ संपर्क साधा फिर खान-पठान से, अतः इस वर्ग में हिन्दू और मुसल्मा न के उच्च वर्ण दबदबा है । यह वर्ग ही भारतीय समाज में उच्च एलिट वर्ग के रूप में स्थापित हुआ । 200 साल के अंग्रेजों के राज में, यह वर्ग ही सत्ता के हर शीर्ष पर काब़ीज भी हुआ और सत्ता 1947 में हुए हस्तांतरण के बाद भी शीर्ष पर बना रहा है । अंग्रेजी इस वर्ग का ही भाषा है । अंग्रेजीयत इस वर्ग का ही सांस्कृतिक वर्चस्व भी है । अंग्रेजी, वर्चस्व के हथियार के रूप में राजनैतिक. आर्थिक एवं ज्ञान की सत्ता को इस देश की 3% आबादी तक समेटे रखती है । अतः यह अंग्रेज़ीयत का सिस्टम ही भ्रष्टाचार, गैर-बराबरी और शोषण की व्यवस्था क...

ये जाति और मज़हब की दीवारें...............

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ये जाति और मज़हब की दीवारें............... ये जाति और मज़हब की दीवारें गरीब-मजदूर-मध्यमवर्गीय लोगों को बाटे रखने के लिए है....नीचे की लिस्ट जरूर पढ़े...और जचे तो शेयर करना न भुलें... बुर्जवा-शोषक-संपत्तिवान-शासक तबके के लिए मजहब कही दीवार नहीं... विवाह संबंध..एक गरीब-मजदूर-मध्यमवर्गीय मुस्लमान और गरीब-मजदूर-मध्यमवर्गीय हिन्दु के बीच होता तो एक नया गोधरा या सहारनपुर कांड होने में देर न लगती.... दोनों मज़हबों के ठेकेदार फतवे जारी करते.... प्रेमी-प्रमीका/पति-पत्नी की ऑनर किलिंग हो जाती.. उनकी लाश को दरख्तों पर टांग दिया   जाता... कि उसे देख कोई दूसरा दुसाहस न कर सके.... [8/3 6:31 am]   अश्विनीकुमार ' सुकरात ' जनचेतना-अभियान   :   मज़हब और जाति ......... सिर्फ और सिर्फ शारीरिक एवं मानसिक मजदूरी करने वाले मजदूर-गरीब-मध्यम वर्ग को बांटे रखने का हथियार है... हिन्दु-मुस्लमान वैवाहिक संबंधों को लेकर आयी पोस्ट को पढ़े फिर हमारे जबाब को भी..... 🙏 🙏 🙏 🙏 🙏   जब इंसानियत का अंकुर फुटेगा..तब मज़हब और जाति की दीवार टुटेगा 🌺 🌺 🌹 [8/3 12:08 am] ‪ +91 88003 ...

क्या टीकटों के आबंटन की प्रक्रिया लोकतांत्रिक है???

एक साथी की पोस्ट‬......ओर हमारा जबाब... स्कूल परीक्षा में*-: तमिलनाडु का मुख्यमंत्री कौन है ? *उत्तर-:* *त्रैमासिक परीक्षा : जयललिता* *अर्धवार्षिक परीक्षा : पनिरसेव्ल्म* *वार्षिक परीक्षा : पलानी स्वामी* भयानक मजाक हुआ है तमिलनाडु के बच्चो के साथ .😂😆😂😆😂😆 अश्विनी कुमार "सुकरात": का जबाब.............. शिक्षा को जानकारियों के स्तर से ऊपर उठा कर विश्लेषण और मूल्यांकन के स्तर पर ले जाए.. तमिलनाडु या किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री का चयन करने में पार्टी हाई कमान और विधायक दल में से किसको संविधान ने अधिकार दिया और कौन सा यथार्थ में प्रयोग हो रहा है.. विधायकी सांसदी के लिए टीकटों के आबंटन में किसकी भूमिका यथार्थ में है और क्यों ?? यदि टीकटों का आबंटन में कार्यक्रताओं की भूमिका नदानंद और कार्यकर्ताओं के स्थान पर हाई कमान की ही भूमिका है, पहले जैसे राजा जागीर बाटते थे वैसे ही अब पार्टीहाईकमान उम्मीदवारी की टीकट बटते है, तो क्या हम इस व्यवस्था को लोकतांत्रिक व्यवस्था कहे भी?? कैसे हम इसे लोकतंत्र कह सकते है???? ऐसे प्रश्न जो बच्चों ...

वैज्ञानिक द्वंधात्मक भौतिकतादी नजरिया/पैराडाईम

मार्क्सवाद कम्युनिजम के नाम कोई एक नहीं सैकड़ों संगठन और संस्था है..अनेकों स्वतंत्र चिंतक जिनका किसी संगठन से कोई लेना देना नहीं है... मार्क्सवाद जिसे हम वैज्ञानिक द्वंधात्मक भौतिकतादी नजरिया/पैराडाईम भी कह सकते है... इस नजरिए से हम वर्गीय हीत के आधार पर दुनिया को देखते है..पैराडाईम... एक संपत्तिवान और उसके चाटुकारों के वर्गीय आर्थिक हीत संपत्तिहीन वर्ग के हीतों से भिन्न है...संपत्ति मजदूर बनाता है और उसपर अधिकार संपत्तिवान कर बैठ जाता है...मेरे और कई संगठनों की खुद की वैचारिक सहमति माओवादी तरिके से नहीं..कई कम्युनिस्ट संगठन तो सीपीआई और सीपीआईएम को कम्युनिस्ट भी नहीं मानते...क्रमशः इस मामूली सेज्ञान के साथ... आपका साथी अश्विनीकुमार 'सुकरात' जनचेतना-अभियान  (भगतसिंहवादी)

देशप्रेम बनाम देशद्रोह

गोधरा में हिन्दु मुस्लमान दंगे देशप्रेम , अयोध्या कांड के बाद सारे देश में दंगे हुए , देशप्रेम,,,नोएडा में बिफ को लेकर देश प्रेम, कश्मीर मेंपाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों को मारा- ये पाकिस्तानियों का देशप्रेम,..1984 में सीखों को मारा ये कांग्रेसियों का देशप्रेम..अभी एक अमेरिकी का देशप्रेम भी दिखा जब नस्लीए गाली के साथ एक भारतीय को गोली मारी........पूरी दुनियाँ में युद्ध के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले और मजदूरों के हीतों की बात करने वाले कम्युनिस्ट देशद्रोही

सेमिनार के आयोजन में 'देशभक्ति' या 'देशविरोधी' नारे बाजी कहा से आ गयी साहेब...

सेमिनार के आयोजन में 'देशभक्ति' या 'देशविरोधी' नारे बाजी कहा से आ गयी साहेब... सैमिनार शुद्ध आकादमिक एक्टिविटी है???? आखिर देश विरोधी नारा कौन लगाा रहा था?????? और क्या इस देश की कानून व्यवस्था से छद्म राष्ट्रभक्तों का विश्वास इतना ख़्तम हो चुका है कि कानून अपने हाथ में ले ले... संघ और बीजेपी के खिलाफ बोलने वालों कि जुबान बंद कर दे.. हमारी बाते कुछ कपटी-राष्ट्रभक्तों सैंसलैस लग रही है.. पर सैंसफुल काम तो शांतिपूर्ण तरिके से चल रहे सेमिनार में पत्थरबाजी करना है.. गुरमेहर ने विरोध किया तो उसे मारने और रेप की धमकी...बाद में अपने को ठीक साबित करने के लिए उसके एक साल पहले की पोस्ट ढुंढ कर लाना जिसमें उसने युद्ध का विरोध किया था उसके आधार पर उसे राष्ट्रद्रोही सिद्ध करना पर ..… एक बार को आपकी बात को तवज़ों देते हुए हम मान भी ले कि वह राष्ट्रद्रोही है भी उसे रेप/बलात्कार की धमकी देना कहा तक सही है..क्या राष्ट्रप्रेमी को राष्ट्रद्रोही से बलात्कार करने की छुट इस देश का कानून देता है...और नहीं तो धमकी देने वाला अब तक छुट्टा कैसे घुम रहा है...????...