भगतसिंह का तरिका : वैचारिक वैज्ञायानिक चेतना जागृत करने का मार्ग

भगतसिंह का तरिका : वैचारिक वैज्ञायानिक चेतना जागृत करने का मार्ग
हमें एक खुले दिमाग से विचार करने की प्रवृति को बढ़ावा देना है.. हरतरह के हिंसात्मक तरिकों का विरोध करना है.. जैसे माओवादियों ने गरीबवर्ग को ही गरीबवर्ग के विरूद्ध खड़ा करने का काम किया...क्योकि जो आदिवासी मरते है वे भी गरीबवर्ग के होते है.... औरअर्धसैनिक बलों में काम करने वाले भी जो मजदूर-किसान के बच्चे ही होते है, न कि टाटा-बिडला-अंबानी खानदान के अर्थाथ वे भी गरीबवर्ग से ही रोजगार की तलास में अर्धसैनिक बलों में शामिल हुए है, ..इसलिए मावोवादी तरिका हमारी वैचारिक लड़ाई को कमजोर करता है....और भारतीय वातावरण में आत्मघाती ही है.. आज हालात में गांधी की अहिंसात्मक ढ़ाल और भगतसिंह का वैचारिक मार्ग ही सार्थक है।
भगतसिंह का तरिका दूर-दूर तक हिसात्मक नहीं था। वे किसान-मजदूर के वैचारिक चेतना को जगाने के पक्षधर थे। उन्होंने खुद माना बम्ब और पिस्तौलों से क्रांति अर्थाथ मौजूदा व्यवस्था में परिवर्तन नहीं आता । मौजूदा व्यवस्था में यदि किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना है, तो वैचारिक क्रांति का मार्ग ही सार्थक है । अतः चेतना के स्तर को जागृत कर शोषण, भष्टाचार, महंगाई, कुपोषण, बीमारी, प्रयावरण अर्थाथ क्रांतिा में समर्थक है। अब यह तरिका ही अधिक सार्थक है।
आप देखे भगतसिंह के बम्ब में धमाका था पर छर्रे नहीं थे ... इसी लिए वैचारिक वैज्ञयानिक चेतना को जागृत करने की जरूरत है..ऐसा कर पाए तो लोकतांत्रिक
तरिके से भी समाजवाद साम्यवाद आ सकता है.....
इस छोटे से वैचारिक प्रश्न के साथ आपका साथी,अश्विनी कुमार सुकरात
जनचेतना-जनमुक्ति अभियान (भगतसिंहवादी)
व्टसएप ब्रॉडकास्टर से जुड़ने हेतू-92104735
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