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Showing posts from 2018

ईद-उल-जुहा पर बधाई के साथ, समस्त इस्लामिक समाज से अपील

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ईद-उल-जुहा पर बधाई के साथ ,  समस्त इस्लामिक समाज से अपील साथियों! यह परम्परा तब शुरू हुई , जब पश्चिम एशिया के रेगिस्तानी इलाकों के लोग कबीलों में रहा करते थे। उन कबीलाई परिवारों में सिर्फ इंसान ही नहीं पशु भी शामिल थे। साथ-साथ रहने की वजह से इंसान का पशुओं के साथ स्नेह का एक परिवारीक नाता था। पर रेगिस्तानी इलाकों की विषमताओं में रहने वाले कबीलाई लोगों को इंसान और पशु में से किसी एक के जीवन को चुनना था। इंसान पशु मोह में फँस कर भोजन के आभाव में अपने को ही समाप्त न कर ले , इससे बचने के लिए ‘ जुहा ’ अर्थात कुर्बानी की परम्परा शुरू हुई। इस परम्परा के अनुसार इंसान जिन पशुओं के साथ विचरण करता था , जो पशु उसके सुख दुःख के साथी हुआ करते थे। उन पशुओं की ही कुर्बानी करना होता था। यहां छुपा उदेश्य इंसानी जिंदगी की रक्षा का था। पर आज न तो इंसान कबीलों में रहता है और न ही पशु उसके परिवार का हिस्सा ही है, जिस तरह कभी कबीलाई समाज में हुआ करते थे। इस्लामिक मान्यता के अनुसार हज़रत इब्राहिम अपने पुत्र हज़रत इस्माइल को इसी दिन खुदा के हुक्म पर खुदा कि राह में कुर्बान करने जा रहे थे , तो...

विश्वविद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया के संबंध में सुधार के विषय में reformofugc@gmail.com को भेजा इमेल

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महोदय, भारत के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया भ्रष्टाचार और चाटुकारिता का अड़ा बन गयी है। इस विषय में युजीसी ने 7 जुलाई, 2018 को reformofugc@gmail.com पर शाम चार बजे तक ई.मेल के माध्यम से सुझाव मांगे थे।असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर निष्पक्ष नियुक्तियाँ हो इसके लिए स्वतंत्र , स्वयत और निष्पक्ष आयोग के माध्यम से ही किया जाए। जिसमें कम से कम राजनीतिक दखलअंदाजी हो। इस विषय पर हमारी तरफ से निम्न सुझाव reformofugc@gmail.com के माध्यम से सरकार को भेजे गये। 1.     उच्च शिक्षा से निजी कॉलेज एवं विश्वनिद्यालयों को पूर्णतः नदानद किया जाना चाहिए। निजी कॉलेजों एवं विश्वविद्यालय ,   शिक्षण संस्थान नहीं रहे , वे तो   ‘ डिग्री ’   नामक कागज के टुकड़े को बेचने की दुकान   बन गये है। 2.     अपवादों को छोड़ दे तो , निजी कॉलेज एवं   विश्वविद्यालय शिक्षकों को जिन शर्तों पर नियुक्त करते है वे दूर-दूर तक अकादमीक नहीं होते।    इन विश्वविद्यालयों में नियुक्ति की शर्त कम सैलरी पर काम ...

आय की असमानता कम हो! समान काम समान वेतन का सिद्धान्त लागू हो!! ठेकेदारी प्रथा ख्तम हो!!

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पहले पे कमीशन में तय सिद्धान्त को पढ़ो, जो सीधे संविधान के समान्तर आया था। पूर्णचः संविधान के सिद्धान्तों के आधार पर। नवउदारीकरण की वर्ल्डबैंक-आईएमएफ नीति की गुलामी को स्वीकार के बाद आए पे कमीशनों ने आय की असमानता को बढ़ाया है। पाँचवे से शुरू , छठे पे कमिशन के बाद तेजी से और सातंवे पे कमीशन ने संविधानिक सिद्धान्तों की धज्जियां ही उड़ाई। छठे पे कमीशन के बाद जहाँ एक तरफ ग्रुप डी और ग्रुप सी की लगभग सारी नौकरियाँ ठेकेदारों के हवाले कर दी गयी। वही ग्रुप ए और बी में नियुक्ति के लिए दौहरे मापदंड़ को अपनाया गया। एक तरफ चंद लोगों की तंख्वाह बेतहासा बढ़ा दी गयी। वही कांट्रेक्ट के आधार पर अधिकतरों की नियुक्ति की जाने लगी। जिसमें सबसे प्रभावित क्षेत्र शिक्षा का ही रहा। क्योकि सबसे ज्यादा ग्रुप बी ए की कांट्रेक्चुअल नौकरियाँ स्कूल से लेकर कॉलेज विश्वविद्यालय तक के शिक्षकों की रही । एक तरफ जहाँ चंद लोगों को बेतहाशा सिक्योर आय दे कर इस समाज से इस कदर काट के बाहर किया है कि उनके हीत आदानी अंबानी के साथ जूड़ गये है। दूसरी तरफ एक बड़ा वर्ग हमेशा अनिश्चितता की स्थिती में रहता है और उसकी स्थिती बद से...

कोर्ट का चपड़ासी/कर्मचारी जज साहेब के घर का 'घरेलू नौकर'...

कोर्ट का चपड़ासी/कर्मचारी जज साहेब के घर का ' घरेलू नौकर '... ‘ डार्क साइड ऑफ इंडियन ज्यूडिशरी ’ से साभार प्राप्त... सत्यता की जांच पा़ठक/दर्शक खुद करें... या इन विडीयों के सबूतों के संदर्भ में इस साईट के मोडरेटर से सम्पर्क करें। पर हम यहाँ पर सिर्फ ये कहना चाहेंगे कि यदि ये विडीयो 1 प्रतिशत भी सत्य है तो , अदालतों से न्याय की उम्मीद बेमानी है। अंग्रेजों ने जो कानून चंद अंग्रेजी हुकूमतदारों की सुरक्षा एवं अंग्रेजों की भारतीयों के ऊपर श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए बनाए थे। वे आज तक वैसे के वैसे है। जनता न्याय की उम्मीद नें तारिख पर तारिख लिए जा रही है। बेगुनाह जेलों में सड़ रहे है। बेगुनाह आदालतों से बच कर निकल जा रहे है। वकील से लेकर आदाल के हर कर्मचारी के माध्यम से जनता की जेब काटी जा रही हो। और अदालते भ्रष्टाचार का गढ़ बनी हुई है। तो ऐसी कानून व्यवस्था में न्याय की उम्मीद करना बेमानी है। जहहां जज की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति अपने पद का दुरूपयोग करता हो। जहां उगाही का पैसा ऊपर से नीचे तक सबमें बटता हो, ऐसी न्याय - कानून व्यवस्था में बलात्कार चोरी डकैती हर तरह के अपराध ब...

किसान का बुरा हाल, बिचौलिया माला-माल

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नवउदार मनो-मोदी (अर्थ)व्यवस्था में... जब तक फसल किसान के पास तब तक उसका ‘ कौड़ी ’ है भाव फसल लगी बिचौलियों के हाथ, अब बिकेगी ‘ हीरे ’ के भाव बिचौलियों को संरक्षण देने वाली मनो-मोदी नीति से है खेतीहर-गरीब जनता का हुआ, बुरा हाल ना तो किसानों को ही मिलता है, फसल का सही दाम और न ही गरीब जनता को मिलता उचित कीमत पर खाद्य समान , बस , बिचौलियों (आढतियों , सट्टेबाजों) का मुनाफा   पक्का बढ़ता है....... सट्टेबाजी चोखी है, और खेती के धंधे में घाटा है खेतीहर जिस फसल को खुन पसीने से लहलहाता है, बिचौलिया उस फसल को सड़ा कर, मुनाफ़ा कमाता है इधर किसान फांसी खाता है, उधर बिचौलिया सम्मान पाता है। इसलिए मेरे भाईयों !! मंड़ी में बैठे बिचौलियों,आढतियों , सट्टेबाजों को भगाओं ! , कास्तकार-गरीब किसान बचाओं !! जन-जन को खाद्य सुरक्षा के घेरे में लाओं !!! @ भारत का आर्थिक,समाजिक एवं राजनैतिक रूप से दलित वर्ग बाकलम-अश्विनी   कुमार ‘ सुकरात ’

देश के सबसे घने जिले, उत्तरी-पूर्वी दिल्ली की अनियोजित कॉलोनी, सोनिया विहार के बच्चों को शिक्षा अधिकार प्राप्त हुआ? आप भी अपने क्षेत्र का अध्ययन करें।

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देश के सबसे घने जिले, उत्तरी-पूर्वी दिल्ली की अनियोजित कॉलोनी, सोनिया विहार के बच्चों को मिले ‘ शिक्षा अधिकार ’ का मूल्यांकन Ø   समस्या क्षेत्र दिल्ली राज्य के उत्तरी-पूर्वी जिले में आता है। District Census Handbook of All the Nine Districts   से मिली जानकारी के अनुसार उत्तरी-पूर्वी जिले की विशेषताएं :- ·          यह जिला राज्य के कुल क्षेत्रफल का 4.2 प्रतिशत हिस्से में है और क्षेत्र के हिसाब में यह जिला छठे स्थान पर आता है। ·          जनसंख्या के मामले में , यह जिलों के बीच पांचवें स्थान पर है क्योंकि यह दिल्ली की जनसंख्या का 13.4 प्रतिशत आबादी साझा करता है। ·          जिले की आबादी का घनत्व 36155 है, जो देश में सबसे ज्यादा है। ·          0-6 आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात 13.5 % है। जो इस राज्य में सबसे ज्यादा है। ·          83.1 % साक्षरता दर के साथ, इस जि...