कोर्ट का चपड़ासी/कर्मचारी जज साहेब के घर का 'घरेलू नौकर'...


कोर्ट का चपड़ासी/कर्मचारी जज साहेब के घर का 'घरेलू नौकर'...
डार्क साइड ऑफ इंडियन ज्यूडिशरी से साभार प्राप्त...
सत्यता की जांच पा़ठक/दर्शक खुद करें... या इन विडीयों के सबूतों के संदर्भ में इस साईट के मोडरेटर से सम्पर्क करें।
पर हम यहाँ पर सिर्फ ये कहना चाहेंगे कि यदि ये विडीयो 1 प्रतिशत भी सत्य है तो, अदालतों से न्याय की उम्मीद बेमानी है। अंग्रेजों ने जो कानून चंद अंग्रेजी हुकूमतदारों की सुरक्षा एवं अंग्रेजों की भारतीयों के ऊपर श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए बनाए थे। वे आज तक वैसे के वैसे है। जनता न्याय की उम्मीद नें तारिख पर तारिख लिए जा रही है। बेगुनाह जेलों में सड़ रहे है। बेगुनाह आदालतों से बच कर निकल जा रहे है। वकील से लेकर आदाल के हर कर्मचारी के माध्यम से जनता की जेब काटी जा रही हो। और अदालते भ्रष्टाचार का गढ़ बनी हुई है। तो ऐसी कानून व्यवस्था में न्याय की उम्मीद करना बेमानी है। जहहां जज की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति अपने पद का दुरूपयोग करता हो। जहां उगाही का पैसा ऊपर से नीचे तक सबमें बटता हो, ऐसी न्याय-कानून व्यवस्था में बलात्कार चोरी डकैती हर तरह के अपराध बढ़ेंगे आप न्याय की उम्मीद भूल जाएं। अंग्रेजो के जमाने का कानून आज भी चलते है। वे कानून अब अंग्रेजों के बाद काले अंग्रेजों को संरक्षण देते है। अतः अंग्रेजों के कानून खत्म करों। न्यायालय कानून और व्यवस्था की भाषा कैसी हो जनता बोले वैसी हो। – बाकलम अश्विनी कुमार सुकरात
https://m.youtube.com/watch?v=3ihl46MfPaY
https://m.youtube.com/watch?v=bbCa2a_trb0
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जन-शिक्ष एवं शिक्षाशास्त्र कार्यक्रम - शिक्षाको मैकालीयन एवं वर्ण-वर्गवादी गुलामी के ढ़र्रे से मुक्ति का प्रयास
जनचेतना जनमुक्ति
(सा विद्या या विमुक्तये एवं अप्प दीपो भव:)
(सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, प्रतिष्ठा और अवसर की समता एवं हर व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार हासिल हो!!)
विचार करें! विमर्श करें! आलोचना-समालोचना करें! और कुछ नहीं तो, जनमुद्दों पर बात-चीत ही करें, पर चुप न रहें! जांच-पड़त्ल कर ही संदेशों को सांझा करें!! तर्कपूर्ण लगे जनजागरण की इस मुहिम में शामिल हो!!
फोन/फेसबुक/व्टसएप/इमेल संपर्क : 9210473599, 8178499080

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