किसान का बुरा हाल, बिचौलिया माला-माल


नवउदार मनो-मोदी (अर्थ)व्यवस्था में...
जब तक फसल किसान के पास तब तक उसका कौड़ी है भाव
फसल लगी बिचौलियों के हाथ, अब बिकेगी
हीरेके भाव
बिचौलियों को संरक्षण देने वाली मनो-मोदी नीति से
है खेतीहर-गरीब जनता का हुआ, बुरा हाल
ना तो किसानों को ही मिलता है, फसल का सही दाम
और
न ही गरीब जनता को मिलता उचित कीमत पर खाद्य समान,
बस, बिचौलियों (आढतियों, सट्टेबाजों) का मुनाफा  पक्का बढ़ता है.......
सट्टेबाजी चोखी है, और खेती के धंधे में घाटा है
खेतीहर जिस फसल को खुन पसीने से लहलहाता है,
बिचौलिया उस फसल को सड़ा कर, मुनाफ़ा कमाता है
इधर किसान फांसी खाता है, उधर बिचौलिया सम्मान पाता है।
इसलिए मेरे भाईयों!!
मंड़ी में बैठे बिचौलियों,आढतियों,सट्टेबाजों को भगाओं!, कास्तकार-गरीब किसान बचाओं!!
जन-जन को खाद्य सुरक्षा के घेरे में लाओं!!!
@भारत का आर्थिक,समाजिक एवं राजनैतिक रूप से दलित वर्ग
बाकलम-अश्विनी  कुमार सुकरात




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