प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए है..’आरक्षण’ की व्यवस्था । मनुवादी-ब्राह्मणवर्चस्ववादी व्यवस्था से उपजी समाजिक गैरबराबरी की प्रतिक्रिया ही है 'आरक्षण' की व्यवस्था...
प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए है.. ’ आरक्षण ’ की व्यवस्था मनुवादी - ब्राह्मणवर्चस्ववादी व्यवस्था से उपजी समाजिक गैरबराबरी की प्रतिक्रिया ही है ' आरक्षण ' की व्यवस्था... ब्राह्मणवादी व्यवस्था से उपजी समाजिक गैरबराबरी की प्रतिक्रिया ही ' आरक्षण ' की वर्तमान व्यवस्था है। आरक्षण आर्थिक नहीं समाजिक गैरबराबरी समाप्त करने का व्यवस्थागत प्रयास भर है। समाज के हर तबके का व्यवस्था में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए। आज आरक्षण को लेकर पक्ष विपक्ष आमने सामने है। ना ना तरिके से इस मुद्दे पर भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि इसका फायदा आर्थिक रूप से कमजोर समाज के नीचले तबके तक नहीं पहुंच पाया है। परंतु आरक्षण की व्यवस्था ने जिस प्रतिवाद को जन्म दिया, उस प्रतिवाद से इंकार नहीं किया जा सकता है। वह वाद है जन्म के आधार पर समाजिक रूप से श्रेष्ठता के आरक्षण का । आज, आरक्षण के माध्यम से समाज के एक तबके को ऊपर उठाने की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योकि भारतीय समाज में एक बड़े तबके को जन्म के आधार पर अछूत माना जाता रहा है । क्यों पिछले 5000 सालों से, कर...