क्या वामपंथी और कम्युनिस्ट देश द्रोही है?
एक हमारे फेसबुकिया साथी है, जो हमपर लगातार बेतूके आरोप लगाते रहते है। जब
आरोप लगाने के लिए कुछ नहीं मिलता तो वामपंथी या कम्युनिस्ट लिख दते है। मुझें
मालूम नहीं कि उन्हे कम्युनिस्ट शब्द का अर्थ भी मालूम है या नहीं। मुझे नहीं
मालूम कि वामपंथ के इतिहास की उनको कितनी जानकारी है और उसको वामपंथ और कम्युनिजम
में फर्क भी मालूम है या नहीं? कम्युनिजम की कितनी धाराए
प्रचलित है इसकी कितनी समझ है, यह भी नहीं मालूम। शिक्षा
स्वास्थ्य सेवाओं के राष्ट्रीयकरण और भाषा के स्थानीयकरण की मांग पहले किसकी
रही...इस संदर्भ में ऐतिहासिक जानकारी भी शायद ही उठाने की जहमत शायद ही की
हो।वैसे तथ्यात्मक आलोचना के ना किसने रोका है। पर यदि आप वर्तमान व्यवस्था के
किसी भी पहलू की आलोचना कर रहे हो, तो आप या तो वामपंथी या
कम्युनिस्ट है? और पता नहीं किस आधार पर संकल्पना गढ़ी है कि
वामपंथी और कम्युनिस्ट देश द्रोही है। इसलिए शिक्षा, स्वास्थ्य,
भाषा व्यवस्था, आवास, न्यायव्यवस्था
किसी भी पहलू पर आलोचना करो तो आप देश द्रोही हो।
मैं जानना चाहता हूँ
क्या आज वामपंथियों की वजह से रोजगार दर 1% से नीचे यहा तक की संगठित
क्षेत्र में ऋणात्मक भी हो गयीा है?? क्या वामपंथियों की वजह
से शिक्षा का निजीकरण धड़ल्ले से हो रहा है?? क्या आज
वामपंतियों की वजह से सार्वजनिक फंड से चलने वाले सरकारी हस्पताल ठप्प और निजी
हस्पताल फल-फुल रहे है?? क्या वामपंथियों की वजह से देश का
पट्टा-पट्टा बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को औने पौने दाम पर बेचा जा रहा है? क्या आपकी जानकारी में है कि पूंजीवादी दार्शनिकों जैसे एडम स्मिथ,
जे एम मिल ने शिक्षा स्वास्थ्य सेवा को सार्वजनिक फंड से चलाने की
बात की... क्या वे भी वाम पंथी थे? आज शिक्षा, स्वास्थ्य आदि जीवनउपयोगी सेवाओं को सार्वजनिक फंड से पोषित कर युरोप
जापान, चीन तरक्की कर गये। और हम चाईनिज मोबाईल से लोगों को
चाईनिज चीजों के बायकाट की अपील करते है।
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