सिर्फ अंकों का प्रतियोगी स्वजीवी नहीं, परस्पर सहयोगी - सचेतन, वैज्ञानिक रूप से विवेकशील बनने की शिक्षा दे

श्री हरीश जी, जो मेरी बेटी के स्कूल के प्रचार्य है.. उनका एक संदेश हमारे व्टसऐप पर आया, जिसका जबाब भी नीचे है...कृपया दोनों पढ़े..
सही लगे तो, आगे शेयर भी करे..
[23/5 6:50 am] हरीश चन्द्र पाण्डे जी, प्रचार्य: कृपया आप अपना नाम पता और मोबाइल नम्बर मुझे वट्सऐप कर दीजिए आप सब को कुछ उपहार भेजना है।
[23/5 10:56 am] अश्विनी कुमार 'सुकरात': 
माननीय प्रचार्य हरीश जी,
आप बच्चों को परिवेश से जुड़ी रचनात्मक शिक्षा दे. यह ही हमारे लिए सबसे बड़ा तौहफा होगा.. जिससे बच्चा अपने परिवेश मे घटीत घटनाओं का अवलोकन, विश्लेषण और मूल्यांकन कर स्व ज्ञान निर्माण कर सके.
यदि अग्रेजी में पढ़ाना आपके स्कूल की मजबूरी भी है, तो..भाषा के रूप में अंग्रेजी सीखाए यहाँ तक तो ठीक है, पर उसे अंग्रेजी का रटू तोता मत बनाए..न ही अंग्रेजीयत का मानसिक गुलाम..अंग्रेजी समेत, सभी विषयों को बच्चे की बोलचाल की भाषा में ही पढ़ायें.. न कि अंग्रेजी में रटाए....
3R रीडिंग राईटिंग और सम अर्थमैंटिक अर्थात गुलामी की मानसिकता गढ़ने वाली मैकालियन शिक्षा की जगह 3H हैंड हार्ट और हैड अर्थात दिमाग को दिल और हाथों से जोड़ने वाली शिक्षा के माध्यम से बच्चे का उसके परिवेश के प्रति जुड़ाव पैदा करे.(जापान, चीन, शिक्षा के माध्यम से तरक्की करने वाले देशों में मातृ परिवेश की भाषा में यह ही विधी अपनायी जाती है) ताकि वह स्कूल के औपचारिक ज्ञान को स्कूल के बाहर के अनौपचारिक ज्ञान के आपसी तुलना से वह अपना व्यवहारिक ज्ञान का सृजन कर पाए.. और इस प्रकार वह अपनी मौलिक एवं व्यवहारिक समझ बनाने के काबिल बन सके.. आज परिवेश से कटी मैकालियन शिक्षा की वजह से बच्चा रट रट कर कक्षा पास कर अहर्ता तो हासिल करता जाता है. पर वह व्यवहारिकता कभी हासिल नहीं कर पाता.
हाथ से किए जाने वाले कामों की इज्जत न केवल इज्जत दे..बल्कि हाथ के काम करवाए भी. तब ही वह कर के सीखने की क्षमता हासिल करेगा..(जापान में तो बच्चे स्कूल के टॉवायलेट तक खुद साफ करते है.)
जज़्बाती तौर परिवेश के लोगों से जुडाव..परस्पर सहयोग, मिल कर काम करने का भाव.. ना कि सिर्फ और सिर्फ व्यक्तिगत अंकों से व्यक्तिगत सफलता की प्रतियोगिता का भाव.. अफ्रिकी कहावत है कि यदि छोटी दौड़ लगानी है, तो अकेले दौड़ो.. और यदि लम्बी दूरी तय करनी है तो मिल कर चलों..
अतः यही अनुरोध करूगा कि मिल कर चलना सीखाए न कि व्यक्तिगत तौर पर दौड़ना कर अकेले आगे बढ़ जाना..
आपका सहयोगी अभिभावक
अश्विनीकुमार 'सुकरात'जनचेतना-अभियान
दिल्ली 9210473599

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