जनता सचेत हो, तुम्हेँ दरकिनार करने वाले नेताओं को दर्किनार करों!
जो लोग चुनाव के वक्त हाथ जोड़कर,
वोट मांगने आते थे,
किसी को माँ, किसी को बहन,
किसी को बाबूजी कहते थे,
वे चुनाव के बाद,
और संकट की इस घड़ी में,
क्यों नहीं देखने आये कि
उनकों वोट देने वाले,
उनके तथाकथित माँ, बाबूजी,
बहन, भाईयों और उनके बच्चों,
ने खाना खाया या नहीं,
क्या जनता के इन तथाकथित पुत्रों/पुत्रियों(नेताओं),
को जनता ने वोट देकर,
नेता इसी दिन के लिए बनाया था?
कि
मुसीबत की घड़ी में,
जब घर-घर में कनस्तर खाली है,
बच्चे दाने-दाने को मोहताज है,
घर के कमाऊ के पास रोजगार नहीं है,
न किराये के पैसे, न स्कूल की फीस का इंतजाम,
जनता जलालत झेलने को विवश है,
तो,
वोट मांगने आये उनके नेता
मुंह छूपा कर बैठ जाएं हैं।
या
गायब हो जाएं हैं,
ठीक उसी तरह जैसे गधे के सर पर सींग,
और
फिर ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे अब,
लेकर फिरते रहो दूरबीन,
ऐसे नेताओं और उनकी पार्टियों को
जनता को तत्काल चलता करें,
पर,
नेताओं और उनके लगूओं भगूओं को,
फिर कभी
अपनी गली, अपने मुहल्ले,अपने इलाकों में, घुसने न दे।
पर,
इन नेताओं को भी मालूम है,
जनता बेवकूफ है,
फिर से
ये कष्ट भूलकर फिर से,
धर्म-जाति के चक्कर में पड़ जाएगी,
झूठें वादों के झासे में बीना जांच किये आ जाएगी,
चुनाव के ठीक पहले कोई जूमला फोडा जाएगा,
प्रचार के लिए,
मीडियाओं का घराना ही खरीद लिया जाएगा,
और..
जनता का क्या है,
जनता फिर जूमलो के जाल में फस जाएगी,
नेता तो है ही मछली के शौकीन,
पांच साल तक इन फंसी मछली को,
कभी तल कर, कभी भुन कर खाएंगे।
बस कुछ ऐसे ही चलता रहेगा,
नेताओं का यह ऐशतंत्र,
माफ करना,
गलत बोल गया,
बीना लोक का, लोकतंत्र
जन को दबा कर, जनतंत्र..
..........
ऊपर लिखी गई बातें हर पार्टी और उसके नेता को अपने पर कही लग सकती है। कृपया अनुरोध है कि कोई भी पार्टी और नेता इसे अपने पर ना ले। जनता का क्या है? वो तो है ही बुरबक..
9210473599, 8178499080
जनचेतना-से-जनमुक्ति

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